हर शहर कि सुबह अलग है
कहीं ठंडी ओंस कि खुशबू
तो कहीं कड़कती चाय कि महक है
कहीं के स्वच्छ हवा से दिल खुश हो जाता है
तो कहीं कि पुरानी यादें एक खालीपन का एहसास दिलाती हैं
दिल के कोने में छुपे उस बंद दरवाज़े पे मानो
ज़मानों बाद किसी ने हल्की से दस्तक दी हो
दरवाज़ा खोलने का मन तो बहुत करता है
पर दिल हार जाने का डर भी लगता है
बस उस लम्हे कि तस्वीर आंखों में उतार लेते हैं
और रोज़ के तरह आगे चल देते हैं
अपनी मंज़िल कि तलाश में
शहर दर शहर अंजानी गलियों का यह सफ़र
ना जाने कब खत्म होगा
आज़ाद पंछी भी शाम होते ही घर लौट आते हैं
और हम है कि पता बदलते रहते हैं उस एक घर की तलाश में
मोह का यह जो मायाजाल है इससे कोई नही बच पाया है
बस दिल में आस लिए बैठें हैं
एक दिन वो खुशी हमे भी नसीब होगी
जिसके लिए हम घर छोड़ के निकले थे
बस उस दिन हम भी अपने घर लौट आएंगे
यहीं इस गंगा घाट पे फिर से तुमसे टकराएंगे
फिर वोही आरती होगी
फिर वोही सुकून होगा
फिर वोही गहरी बातें बतियाएंगे
पर तब तक इंतज़ार करना हमारा
हम लौट के ज़रूर आएंगे
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