ख्वाहिशों का बोझ लिए चल रहे थे हम
यूंही रास्ते में तुमसे टकरा गए
सपनो को हकीकत में बदलते देखा मैंने
जब हम और तुम यूं पास आ गए
ठोकर लगी ऐसी कि ज़िन्दगी कि काया ही पलट गई
खुशियां मानो छिन सी गई और सपने कहीं खो से गए
खालीपन ने ज़िन्दगी को ऐसा जकड़ा
कि मेरी पटर पटर करती ज़ुबान पे ताला लगा दिया
शिकायते तो बेशुमार है ज़ेहन में
पर चाहे जितना कोस लूं तुम्हे
अगर आज भी तुम सामने आ जाओ
धड़कने बढ़ जाती हैं और गाल टमाटर से ज़्यादा लाल हो जाते हैं
कंभकत ये दिल तुमसे आज भी बेइंतेहा मोहब्बत करता है
तुम पे भले ही अब मेरा हक नहीं
पर इस अधूरे इश्क़ पे हमेशा मेरा हक रहेगा
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